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Topic: Blogger vs WordPress in 2025: Ultimate Guide for Indian Creators

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OYO में कपल्स पर प्रतिबंध: क्या है कानूनी स्थिति और संभावित परिणाम

हाल ही में कुछ राज्यों में OYO जैसे होटल्स में "अविवाहित जोड़ों" के रुकने को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई जगहों पर केवल विवाहित जोड़े (हसबैंड-वाइफ) ही होटल का कमरा बुक कर सकते हैं, और उन्हें शादी का प्रमाणपत्र (मैरिज सर्टिफिकेट) दिखाना अनिवार्य किया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि यह नियम किस कानूनी आधार पर लागू किया जा रहा है? आइए समझते हैं विस्तार से:




1. कानूनी प्रावधान क्या कहते हैं?


भारतीय दंड संहिता (IPC):


अगर कोई जोड़ा बिना शादी के होटल में रुकता है, तो IPC की धारा 294 ("अश्लीलता") या धारा 290 ("सार्वजनिक शांति भंग") के तहत केस दर्ज हो सकता है। हालाँकि, यह तभी लागू होता है जब कोई "अनैतिक गतिविधि" या "सार्वजनिक उपद्रव" साबित हो।


IPC की धारा 188 ("सरकारी आदेश की अवहेलना") भी लागू की जा सकती है, अगर राज्य सरकार ने होटल्स को कपल्स के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की हों।


होटल रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1867:


इस कानून के तहत होटल्स को गेस्ट्स के आईडी प्रूफ़ और डिटेल रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य है, लेकिन शादी का प्रमाणपत्र मांगने का कोई प्रावधान नहीं है।


1. सार्वजनिक नैतिकता (Public Morality):

कुछ राज्यों में पुलिस "सार्वजनिक नैतिकता" के नाम पर अविवाहित जोड़ों को होटल में रुकने से रोकती है, लेकिन यह कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) की धारा 144 या स्थानीय कानूनों के तहत किया जाता है।


2. क्या शादी का प्रमाणपत्र दिखाना अनिवार्य है?

कोई राष्ट्रीय कानून नहीं: भारत में कोई केंद्रीय कानून नहीं है जो


अविवाहित जोड़ों को होटल में रुकने से रोकता हो।


राज्य-स्तरीय निर्देश: गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पुलिस ने होटल्स को सलाह दी है कि वे "संदिग्ध जोड़ों" का डिटेल चेक करें। यह एक कानूनी आदेश नहीं, बल्कि प्रशासनिक दिशा-निर्देश है।


निजता का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के Puttaswamy जजमेंट में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना है। बिना वैध कारण के शादी का प्रमाणपत्र मांगना इस अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।


3. क्या हो सकते हैं परिणाम?

होटल पर कार्रवाई: अगर होटल प्रबंधन बिना शादी के प्रमाणपत्र के कपल को कमरा देता है, तो पुलिस IPC धारा 188 के तहत होटल के खिलाफ केस दर्ज कर सकती है।


जोड़े पर कार्रवाई: अगर पुलिस को लगता है कि जोड़े की मंशा "अनैतिक" है, तो वे IPC धारा 294 या धारा 34 (साझा इरादा) के तहत गिरफ्तारी कर सकते हैं। हालाँकि, यह केस-टू-केस आधार पर निर्भर करता है।


जुर्माना या जमानत: ऐसे मामलों में आमतौर पर 500–1,000 रुपये जुर्माना या 7-15 दिन की जेल हो सकती है, लेकिन यह गंभीरता पर निर्भर करता है।


4. क्या करें अगर पुलिस परेशान करे?

वकील से संपर्क करें: पुलिस अगर बिना वारंट के आपको परेशान करे, तो CrPC की धारा 41 के तहत उनकी कार्रवाई चुनौती दे सकते हैं।


कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत: अगर होटल ने बिना कानूनी आधार के आपको कमरा देने से मना किया है, तो कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत मुआवजा मांग सकते हैं।


मानवाधिकार आयोग (HRC): अगर पुलिस ने आपके साथ भेदभाव किया है, तो राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराएँ। 5. कानूनी विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

वकीलों का मानना है कि "अविवाहित जोड़ों को होटल में रुकने से रोकना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और निजता का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (समानता) का उल्लंघन है।" सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के हादिया केस में कहा था कि "दो वयस्कों का साथ रहना उनका निजी फैसला है।"


निष्कर्ष:


OYO या किसी भी होटल में कपल्स के रुकने पर प्रतिबंध कानूनी रूप से अमान्य है, जब तक कोई अदालत या संसद द्वारा पारित कानून इसे सपोर्ट न करे। अगर आपके साथ ऐसी कोई घटना होती है, तो कानूनी सलाह लेना और अधिकारों के लिए लड़ना ही सही रास्ता है।

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